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ध्यान📜 भागवत पुराण, विष्णु पुराण, शिव पुराण, नारद भक्ति सूत्र1 मिनट पठन

ध्यान के दौरान भगवान का ध्यान कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

भगवान ध्यान: भागवत (2.2.8-14): पाद → उरु → नाभि → हृदय → मुख → नेत्र — क्रमिक ध्यान। शिव पुराण: श्वेत रूप, जटाजूट, त्रिनेत्र का ध्यान। नारद भक्ति सूत्र: रूप, गुण, लीला, धाम, नाम — पाँचों पर ध्यान। मंत्र-सहित मानस ध्यान सर्वश्रेष्ठ।

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विस्तृत उत्तर

भगवान का ध्यान दो प्रकार से होता है — सगुण (मूर्त) और निर्गुण (अमूर्त)।

सगुण ध्यान की विधि (भागवत पुराण 2.2.8-14)

क्रमिक ध्यान पद्धति

  1. 1पाद-ध्यान — भगवान के चरण-कमलों का ध्यान करें
  2. 2उरु-ध्यान — जंघाओं का ध्यान करें
  3. 3नाभि-ध्यान — नाभि-कमल का ध्यान करें
  4. 4हृदय-ध्यान — हृदय में श्रीवत्स-चिह्न का ध्यान करें
  5. 5मुख-ध्यान — मुखारविंद का ध्यान करें
  6. 6नेत्र-ध्यान — शांत, करुण नेत्रों का ध्यान करें

शिव ध्यान (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता)

ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं...' — ध्यान में शिव के श्वेत रूप, जटाजूट, त्रिनेत्र और चंद्रमा का स्मरण करें।

नारद भक्ति सूत्र (54): भगवान के रूप, गुण, लीला, धाम और नाम — इन पाँचों पर ध्यान करने से भक्ति परिपक्व होती है।

व्यावहारिक सलाह

  • सामने मूर्ति या चित्र रखें
  • आँखें बंद कर मन में उस रूप को स्थिर करें
  • मंत्र (जैसे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का मानसिक जप करें
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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण, विष्णु पुराण, शिव पुराण, नारद भक्ति सूत्र
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