विस्तृत उत्तर
गणेश पूजा के कुछ विशेष नियम हैं जिन्हें न जानने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता:
सबसे बड़ी गलती — तुलसी चढ़ाना। गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाना पूर्णतः वर्जित है। पुराणों में इसके पीछे एक कथा है — तुलसी (वृंदा) ने विवाह का प्रस्ताव रखा जिसे गणेश जी ने अस्वीकार किया, जिस पर तुलसी ने श्राप दिया और गणेश जी ने प्रतिश्राप। इस कारण गणेश और तुलसी में बैर भाव है। तुलसी चढ़ाने से पूजा निष्फल होती है।
दूसरी गलती — टूटे दाँत वाली गणेश मूर्ति की स्थापना। गणेश जी 'एकदंत' हैं — एक दाँत उनका पहचान-चिह्न है। परंतु जब दोनों दाँत टूटे हों तो ऐसी मूर्ति घर में स्थापित नहीं करनी चाहिए।
तीसरी गलती — केतकी का फूल चढ़ाना। यह फूल कुछ देवताओं की पूजा में वर्जित है।
चौथी गलती — बासी फूल और भोग अर्पित करना। गणेश जी को सदा ताज़ा और शुद्ध भोग ही अर्पित करें।
पाँचवीं गलती — गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश स्थापना के दिन चंद्र दर्शन वर्जित है — इससे झूठे कलंक लगने का भय है।





