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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में तेरहवें दिन के प्रस्थान का अत्यंत रौद्र चित्रण किया गया है। सपिण्डीकरण के पश्चात आत्मा का अपने लौकिक निवास से संबंध पूरी तरह टूट जाता है। फिर यमराज के अनुचर उसे पकड़ लेते हैं। गले में पाश से बंधा हुआ प्रेत उसी प्रकार खींचा जाता है जैसे पकड़े हुए बंदर को खींचा जाता है। यह 13-दिनीय प्रक्रिया का निर्णायक मोड़ है, जहाँ आत्मा यममार्ग की कठोर यात्रा के लिए निकलती है।
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