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विस्तृत उत्तर
कल्प-भेद का अर्थ है विभिन्न कल्पों में सृष्टि की संरचनात्मक भिन्नता। ब्रह्मांड-भेद का अर्थ है अनंत ब्रह्मांडों में अलग-अलग परिमाण। तपोलोक की दूरी के विषय में शिव पुराण और वैष्णव महापुराणों में जो भिन्न विवरण मिलते हैं, उन्हें विद्वान इसी आधार पर समझते हैं। सनातन दर्शन में अनंत ब्रह्मांडों की संकल्पना है और प्रत्येक कल्प में सृष्टि की संरचना में सूक्ष्म भिन्नताएँ शास्त्रीय रूप से मान्य हैं।
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