विस्तृत उत्तर
सनातन वैदिक विज्ञान के अनुसार, ध्वनि तरंगों (मंत्रों) और यज्ञ की अग्नि के माध्यम से वायुमंडल (Atmosphere) और आकाश तत्व (Ether) में परिवर्तन किया जा सकता है। वेद प्रकृति की शक्तियों को नियंत्रित करने का विज्ञान हैं।
सामवेद और ऋग्वेद में ऐसे कई सूक्त हैं जो मौसम को प्रभावित कर सकते हैं। वर्षा कराने के लिए वैदिक काल में 'कारीरी इष्टि' (Kariri Ishti) नामक यज्ञ किया जाता था, जिसमें 'पर्जन्य सूक्त' (Parjanya Sukta) का विशिष्ट स्वर और लय (छंद) के साथ गान किया जाता था। मंत्रों की विशिष्ट ध्वनि और यज्ञ में डाली जाने वाली विशेष समिधाओं (जड़ी-बूटियों) का धुआं मिलकर बादलों के निर्माण (Cloud Seeding) के लिए आवश्यक दबाव और रसायन उत्पन्न करते थे। अतः पूर्ण सिद्धि और वेदोक्त विधि से आज भी मौसम में परिवर्तन संभव है।




