विस्तृत उत्तर
नित्य जप का महत्व धर्म सिंधु और भागवत पुराण में स्पष्ट रूप से वर्णित है:
धर्म सिंधु
नित्यं जपेत् — प्रतिदिन जप करना चाहिए।' नित्य जप न करने पर पहले से किए जप का फल क्षीण होता है।
नियमितता क्यों जरूरी
1मन का अभ्यास
जैसे शरीर को नित्य व्यायाम चाहिए — मन को नित्य जप चाहिए। एक बार छोड़ने से आदत टूटती है।
2संस्कार निर्माण
भागवत पुराण: नित्य जप से मन में भगवान के नाम का 'संस्कार' बनता है। यह संस्कार जीवन भर रक्षा करता है।
3फल का संचय
मंत्र महोदधि: प्रत्येक दिन का जप संचित होता है। नियमित जप → मंत्र सिद्धि।
4धर्म सिंधु का मत
यदि किसी कारण नित्य जप न हो सके — उस दिन कम से कम 11 जप करें। पूर्णतः छोड़ना उचित नहीं।
5शक्ति का अंतर
- ▸1 दिन जप → 1 दिन का फल
- ▸30 दिन नित्य जप → 30 गुणा से अधिक फल (संचित शक्ति)
- ▸1 वर्ष नित्य जप → जप स्वयं 'सिद्ध' हो जाता है
भागवत
अहर्निशं चिन्तयतो न किञ्चिदन्यत् स्मरेत।' — रात-दिन जो भगवान का स्मरण करे, उसे कुछ और नहीं चाहिए।


