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जप नियमितता📜 धर्म सिंधु — नित्य कर्म, भागवत पुराण, मंत्र महोदधि2 मिनट पठन

क्या मंत्र जप रोज करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

हाँ, नित्य जप अनिवार्य। धर्म सिंधु: 'नित्यं जपेत्।' नियमितता से मन में भगवान का संस्कार। जप संचित होता है — नित्य जप → सिद्धि। समय कम हो तो 11 जप — पूर्णतः छोड़ना उचित नहीं। एक वर्ष नित्य जप → जप स्वयं सिद्ध।

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विस्तृत उत्तर

नित्य जप का महत्व धर्म सिंधु और भागवत पुराण में स्पष्ट रूप से वर्णित है:

धर्म सिंधु

नित्यं जपेत् — प्रतिदिन जप करना चाहिए।' नित्य जप न करने पर पहले से किए जप का फल क्षीण होता है।

नियमितता क्यों जरूरी

1मन का अभ्यास

जैसे शरीर को नित्य व्यायाम चाहिए — मन को नित्य जप चाहिए। एक बार छोड़ने से आदत टूटती है।

2संस्कार निर्माण

भागवत पुराण: नित्य जप से मन में भगवान के नाम का 'संस्कार' बनता है। यह संस्कार जीवन भर रक्षा करता है।

3फल का संचय

मंत्र महोदधि: प्रत्येक दिन का जप संचित होता है। नियमित जप → मंत्र सिद्धि।

4धर्म सिंधु का मत

यदि किसी कारण नित्य जप न हो सके — उस दिन कम से कम 11 जप करें। पूर्णतः छोड़ना उचित नहीं।

5शक्ति का अंतर

  • 1 दिन जप → 1 दिन का फल
  • 30 दिन नित्य जप → 30 गुणा से अधिक फल (संचित शक्ति)
  • 1 वर्ष नित्य जप → जप स्वयं 'सिद्ध' हो जाता है

भागवत

अहर्निशं चिन्तयतो न किञ्चिदन्यत् स्मरेत।' — रात-दिन जो भगवान का स्मरण करे, उसे कुछ और नहीं चाहिए।
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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु — नित्य कर्म, भागवत पुराण, मंत्र महोदधि
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