विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना की खतरनाकता के विषय में कुलार्णव तंत्र और तंत्रालोक में स्पष्ट मत दिया गया है:
शास्त्र का स्पष्ट मत
दक्षिणाचार (सात्विक) तंत्र — सुरक्षित
महानिर्वाण तंत्र में कहा गया है — 'दक्षिणाचार साधना सात्विक और सुरक्षित है।' इसमें मंत्र जप, यंत्र पूजा, हवन — ये सब शामिल हैं। यह किसी के लिए भी हानिकारक नहीं।
वामाचार (उग्र) तंत्र — गुरु के बिना खतरनाक
कुलार्णव तंत्र में स्पष्ट है — 'बिना दीक्षा और गुरु के उग्र साधना घातक हो सकती है।' यह मन को विक्षिप्त कर सकती है।
खतरे कब उत्पन्न होते हैं
- 1बिना गुरु के उग्र मंत्र जप:
कुछ उग्र बीज मंत्र ('हूं', 'क्रीं', 'श्रीं' आदि) बिना दीक्षा के असंतुलन पैदा कर सकते हैं।
- 1दुष्ट उद्देश्य से साधना:
कुलार्णव तंत्र: 'परहानि के लिए की गई साधना साधक को ही नुकसान पहुँचाती है।'
- 1अधूरी साधना:
बिना पूर्ण किए छोड़ी गई साधना मानसिक असंतुलन का कारण बन सकती है।
- 1निशीथ साधना बिना तैयारी:
रात्रि श्मशान साधना आदि — बिना मानसिक तैयारी और गुरु के खतरनाक।
क्या सुरक्षित है
- ▸नित्य भक्ति पूजा
- ▸मंत्र जप ('ॐ नमः शिवाय', 'ॐ क्रीं काल्यै नमः', नवार्ण मंत्र)
- ▸यंत्र पूजा
- ▸सप्तशती पाठ
- ▸हवन
तंत्रालोक (अभिनवगुप्त)
शुद्धं तंत्रं न भयाय, अशुद्धं विकाराय।' — शुद्ध तंत्र भयावह नहीं, अशुद्ध तंत्र विकृति लाता है।



