विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना में सावधानियों का वर्णन कुलार्णव तंत्र और महानिर्वाण तंत्र में है:
1गुरु का मार्गदर्शन
बिना गुरु के उच्च तंत्र साधना न करें। कुलार्णव: 'स्वेच्छाचारी साधक नष्ट होता है।'
2मानसिक तैयारी
साधना से पहले मन स्थिर और भय-रहित हो। भय + तंत्र = नकारात्मक अनुभव।
3शुद्ध उद्देश्य
हानि या वशीकरण के उद्देश्य से साधना — कर्म-नियम साधक को ही लौटाता है।
4भोग का संतुलन
तंत्र भोग को साधन बनाता है — भोग में डूबना नहीं।
5रात्रि साधना
दरवाजे बंद, दीपक प्रज्वलित, माला हाथ में। प्रारंभिक साधकों के लिए एकदम अकेले नहीं।
6कुंडलिनी
कुंडलिनी अनुभव होने पर — गुरु को तुरंत बताएं। अकेले handle न करें।
7षट्कर्म
मारण, उच्चाटन, विद्वेषण — दुरुपयोग से घोर अधोगति।
महानिर्वाण तंत्र
स्वस्थचित्तः सदा योगी जपेत् ध्यायेत् समाहितः।





