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तंत्र सावधानी📜 कुलार्णव तंत्र, महानिर्वाण तंत्र, तंत्रालोक1 मिनट पठन

तंत्र साधना के दौरान क्या सावधानी रखनी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र सावधानी: गुरु का मार्गदर्शन। शुद्ध उद्देश्य (हानि/वशीकरण नहीं)। भय-रहित मन। रात्रि साधना — दरवाजे बंद, दीपक। कुंडलिनी अनुभव — गुरु को बताएं। षट्कर्म दुरुपयोग — अधोगति।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना में सावधानियों का वर्णन कुलार्णव तंत्र और महानिर्वाण तंत्र में है:

1गुरु का मार्गदर्शन

बिना गुरु के उच्च तंत्र साधना न करें। कुलार्णव: 'स्वेच्छाचारी साधक नष्ट होता है।'

2मानसिक तैयारी

साधना से पहले मन स्थिर और भय-रहित हो। भय + तंत्र = नकारात्मक अनुभव।

3शुद्ध उद्देश्य

हानि या वशीकरण के उद्देश्य से साधना — कर्म-नियम साधक को ही लौटाता है।

4भोग का संतुलन

तंत्र भोग को साधन बनाता है — भोग में डूबना नहीं।

5रात्रि साधना

दरवाजे बंद, दीपक प्रज्वलित, माला हाथ में। प्रारंभिक साधकों के लिए एकदम अकेले नहीं।

6कुंडलिनी

कुंडलिनी अनुभव होने पर — गुरु को तुरंत बताएं। अकेले handle न करें।

7षट्कर्म

मारण, उच्चाटन, विद्वेषण — दुरुपयोग से घोर अधोगति।

महानिर्वाण तंत्र

स्वस्थचित्तः सदा योगी जपेत् ध्यायेत् समाहितः।
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शास्त्रीय स्रोत
कुलार्णव तंत्र, महानिर्वाण तंत्र, तंत्रालोक
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