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विस्तृत उत्तर
इस कथा में लक्ष्मी और विष्णु का विरह केवल पति-पत्नी का वियोग नहीं है। यह प्रकृति और पुरुष, श्री और पालन, करुणा और नियम के अलग होने का प्रतीक है। भगवान विष्णु ने प्रेम होते हुए भी कर्म के नियम को नहीं तोड़ा।
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