विस्तृत उत्तर
महाराज प्रियव्रत और उनकी पत्नी बर्हिष्मती के कुल दस पुत्र थे। इन दस पुत्रों में से तीन पुत्र — कवि, महावीर और सवन — परम वैरागी थे और उन्होंने पारमहंस्य आश्रम स्वीकार कर लिया था। शेष सात पुत्रों को महाराज प्रियव्रत ने सात महाद्वीपों का अधिपति नियुक्त किया। श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कन्ध के अनुसार महाराज प्रियव्रत ने आग्नीध्र को जम्बू द्वीप का, इध्मजिह्व को प्लक्ष द्वीप का, यज्ञबाहु को शाल्मलि द्वीप का, हिरण्यरेता को कुश द्वीप का, घृतपृष्ठ को क्रौंच द्वीप का, मेधातिथि को शाक द्वीप का और वीतिहोत्र को पुष्कर द्वीप का शासक बनाया। शासन के उत्तरार्ध में जब इन राजाओं के हृदय में भी वैराग्य उत्पन्न हुआ तो उन्होंने अपने-अपने द्वीपों को खण्डों में विभाजित करके अपने पुत्रों को सौंप दिया और स्वयं तपस्या हेतु वन को प्रस्थान कर गए।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक


