विस्तृत उत्तर
मृत्यु के समय आत्मा (जीवात्मा) शरीर से कैसे निकलती है — इसका सबसे विस्तृत वर्णन बृहदारण्यक उपनिषद (4.4.1-2) में मिलता है।
बृहदारण्यक उपनिषद (4.4.1-2) के अनुसार
- 1मृत्यु के समय शरीर के विभिन्न अंगों से प्राण ऊर्जा सिकुड़कर हृदय में एकत्रित होती है।
- 2हृदय का अग्रभाग प्रकाशित होता है।
- 3प्राण ऊर्जा हृदय से निकलकर शरीर के किसी द्वार (छिद्र) से बाहर निकलती है।
- 4प्राणों के साथ ज्ञान, कर्म और पूर्वानुभव भी निकलते हैं।
- 5आत्मा सूक्ष्म शरीर (लिंग शरीर) सहित निकलती है — यह सूक्ष्म शरीर मन, बुद्धि, अहंकार और संस्कारों का वाहक है।
प्रक्रिया (शास्त्रीय वर्णन)
- 1इंद्रियों का लोप — सबसे पहले बाह्य इंद्रियां (आंख, कान, नाक, जिह्वा, त्वचा) कार्य करना बंद कर देती हैं।
- 2प्राणों का एकत्रीकरण — पांचों प्राण (प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान) हृदय में सिकुड़ते हैं।
- 3उदान वायु का कार्य — उदान वायु आत्मा को शरीर से बाहर ले जाती है। प्रश्नोपनिषद (3.7) में कहा गया है कि उदान वायु मृत्यु के समय ऊपर की ओर ले जाती है।
- 4निर्गमन — आत्मा शरीर के किसी द्वार से निकलती है (विस्तार अगले प्रश्न में)।
गरुड़ पुराण का वर्णन
मृत्यु के समय यमदूत आत्मा को अंगूठे के बराबर सूक्ष्म रूप में शरीर से बाहर खींचते हैं। पुण्यात्मा को यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पापात्मा को अत्यंत कष्टदायक बताई गई है।
वैज्ञानिक दृष्टि से: आधुनिक चिकित्सा में मृत्यु को मस्तिष्क या हृदय के कार्य बंद होने से परिभाषित किया जाता है। आत्मा की अवधारणा आध्यात्मिक/दार्शनिक है, वैज्ञानिक नहीं।





