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मासिक धर्म में घर की पूजा कौन करेगा

संक्षिप्त उत्तर

पति/पुत्र/पुत्री/बुजुर्ग — कोई भी दीपक जलाए, आरती करे। कोई न हो तो 3-5 दिन = दोष नहीं। कुछ परंपरा: महिला दीपक जलाए (मूर्ति न छुए)। पूजा = पूरे परिवार की जिम्मेदारी।

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विस्तृत उत्तर

यदि घर में पूजा करने वाली महिला मासिक धर्म में हो तो:

विकल्प

  1. 1पति/पुत्र/पुत्री — परिवार का कोई अन्य सदस्य दीपक जलाए, आरती करे।
  2. 2बड़े-बुजुर्ग — सास, ससुर, माता-पिता।
  3. 3बच्चे — छोटे बच्चे भी दीपक जला सकते हैं (निगरानी में)।
  4. 4यदि कोई न हो:
  • दीपक जलाना = न्यूनतम। कोई भी जला सकता है (लिंग/आयु का भेद नहीं)।
  • 3-5 दिन दीपक न जले तो भी = दोष नहीं। भगवान भाव देखते हैं।
  • कुछ परंपराओं में महिला स्वयं दीपक जला सकती (मूर्ति न छुए)।

सबसे सरल: पति या बच्चे को दीपक + अगरबत्ती + 1 आरती सिखाएं। 2 मिनट का कार्य।

महत्वपूर्ण: भगवान की पूजा = केवल महिला का काम नहीं। पूरे परिवार की जिम्मेदारी।

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शास्त्रीय स्रोत
लोक परंपरा, व्यावहारिक समाधान
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