विस्तृत उत्तर
जप में ध्यान भटकने के उपाय भगवद् गीता और पातंजल योग सूत्र में वर्णित हैं:
भगवद् गीता (6.35) — अर्जुन की समस्या
अर्जुन ने कहा: 'चंचलं हि मनः कृष्ण।' — हे कृष्ण, मन चंचल है!
कृष्ण का उत्तर (6.35): 'असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्। अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।'
— मन दुर्निग्रह है — किंतु अभ्यास और वैराग्य से वश में आता है।
7 व्यावहारिक उपाय
1माला रोकें
जब ध्यान भटके — माला का मनका रोक दें। ध्यान लौटने पर आगे बढ़ाएं।
2मंत्र का अर्थ
प्रत्येक जप में अर्थ सोचें — अर्थ ज्ञात होने पर ध्यान नहीं भटकता।
3श्वास के साथ
मंत्र को श्वास से जोड़ें — श्वास पर ध्यान टिकने से मन वर्तमान में।
4उपांशु जप
मानस जप में ध्यान भटके तो — होंठ हिलाने वाले उपांशु जप पर आएं।
5पातंजल (1.32-33)
एकतत्त्वाभ्यास' — एक ही तत्व पर बार-बार मन लाना।
6कम, गहरा
5 मिनट पूर्ण एकाग्र > 30 मिनट भटका हुआ।
7भाव
भगवान मुझे देख रहे हैं' — यह भाव मन को शर्म से एकाग्र करता है।
अंतिम सत्य
भटकाव जप का शत्रु नहीं — भटकाव के बाद लौटना ही अभ्यास है।





