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जप एकाग्रता📜 भगवद् गीता (6.26, 6.35), पातंजल योग सूत्र (1.32-33)2 मिनट पठन

मंत्र जप के दौरान ध्यान भटकने से कैसे रोकें?

संक्षिप्त उत्तर

ध्यान भटकने से रोकें: माला रोकें (ध्यान लौटने पर आगे)। मंत्र का अर्थ। श्वास के साथ जोड़ें। मानस से उपांशु पर आएं। 5 मिनट एकाग्र > 30 मिनट भटका। गीता 6.35: 'अभ्यास और वैराग्य से मन वश में।' भटकाव के बाद लौटना ही अभ्यास है।

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विस्तृत उत्तर

जप में ध्यान भटकने के उपाय भगवद् गीता और पातंजल योग सूत्र में वर्णित हैं:

भगवद् गीता (6.35) — अर्जुन की समस्या

अर्जुन ने कहा: 'चंचलं हि मनः कृष्ण।' — हे कृष्ण, मन चंचल है!

कृष्ण का उत्तर (6.35): 'असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्। अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।'

— मन दुर्निग्रह है — किंतु अभ्यास और वैराग्य से वश में आता है।

7 व्यावहारिक उपाय

1माला रोकें

जब ध्यान भटके — माला का मनका रोक दें। ध्यान लौटने पर आगे बढ़ाएं।

2मंत्र का अर्थ

प्रत्येक जप में अर्थ सोचें — अर्थ ज्ञात होने पर ध्यान नहीं भटकता।

3श्वास के साथ

मंत्र को श्वास से जोड़ें — श्वास पर ध्यान टिकने से मन वर्तमान में।

4उपांशु जप

मानस जप में ध्यान भटके तो — होंठ हिलाने वाले उपांशु जप पर आएं।

5पातंजल (1.32-33)

एकतत्त्वाभ्यास' — एक ही तत्व पर बार-बार मन लाना।

6कम, गहरा

5 मिनट पूर्ण एकाग्र > 30 मिनट भटका हुआ।

7भाव

भगवान मुझे देख रहे हैं' — यह भाव मन को शर्म से एकाग्र करता है।

अंतिम सत्य

भटकाव जप का शत्रु नहीं — भटकाव के बाद लौटना ही अभ्यास है।

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शास्त्रीय स्रोत
भगवद् गीता (6.26, 6.35), पातंजल योग सूत्र (1.32-33)
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