विस्तृत उत्तर
जप में मन भटकने का समाधान भगवद् गीता और पातंजल योग सूत्र में मिलता है:
भगवद् गीता (6.26)
यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्। ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्।
— जहाँ-जहाँ यह चंचल मन जाए, वहाँ-वहाँ से खींचकर आत्मा में वापस लाओ।
पातंजल योग (1.12)
अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोधः।' — अभ्यास और वैराग्य से मन का निरोध होता है।
तत्काल उपाय
- 1मनका रोकें: जब ध्यान भटके — माला का मनका रोक दें। माला तभी आगे बढ़ाएं जब पूरा ध्यान हो।
- 2मंत्र का अर्थ: मंत्र के अर्थ को मन में रखें — अर्थ जानने से मन भटकता कम है।
- 3ऊँचा जप: मानस से उपांशु पर आ जाएं — होंठ हिलाने से ध्यान वापस आता है।
- 4श्वास: गहरी साँस लें, मन को वर्तमान में लाएं।
दीर्घकालिक उपाय
- 1अभ्यास: प्रतिदिन जप — धीरे-धीरे मन अभ्यस्त होगा
- 2कम करें, गहरा करें: 100 एकाग्र जप > 1000 बिखरे जप
- 3भूखे न रहें, अधिक न खाएं: पेट भारी हो तो मन सुस्त
नारद भक्ति सूत्र
न तद्विरहे शक्यते।' — भगवान के विरह में मन दूसरी जगह नहीं जाता। विरह भाव जगाएं — मन स्वतः एकाग्र।





