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पूजा विधि📜 वास्तु शास्त्र, शिल्प शास्त्र, धार्मिक परंपरा2 मिनट पठन

पूजा घर का दरवाजा कैसा होना चाहिए

संक्षिप्त उत्तर

पूजा घर का दरवाजा पूर्व/उत्तर में, लकड़ी का, दो पल्लों वाला शुभ है। ॐ/स्वस्तिक नक्काशी, दहलीज रखें। टूटा दरवाजा, काला रंग और शौचालय के सामने दरवाजा वर्जित। अलमारी मंदिर में पर्दा लगाएं।

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विस्तृत उत्तर

पूजा घर का दरवाजा शुभता और पवित्रता का प्रवेश बिंदु माना जाता है।

दरवाजे की दिशा

  • पूर्व या उत्तर दिशा में दरवाजा सर्वोत्तम।
  • दक्षिण या पश्चिम की ओर खुलने वाला दरवाजा अशुभ माना जाता है।

दरवाजे की विशेषताएं

  1. 1दो पल्लों वाला — दो पट (double door) शुभ माना जाता है। यह मंदिर परंपरा के अनुरूप है।
  2. 2लकड़ी का — शुद्ध लकड़ी (सागौन/शीशम) का दरवाजा सर्वोत्तम। लोहे या एल्यूमीनियम से बचें।
  3. 3ऊंचाई — दरवाजा इतना ऊंचा हो कि प्रवेश करते समय झुकना न पड़े, परंतु कुछ परंपराओं में नमन भाव से प्रवेश हेतु छोटा दरवाजा भी बनाया जाता है।
  4. 4सजावट — दरवाजे पर ॐ, स्वस्तिक, कलश या कमल की नक्काशी शुभ।
  5. 5रंग — प्राकृतिक लकड़ी का रंग, सफेद, या हल्का पीला।
  6. 6दहलीज — दहलीज (threshold) होना शुभ माना जाता है — यह बाहरी और भीतरी ऊर्जा का विभाजन करती है।

निषेध

  • दरवाजा टूटा, खंडित या चरमराता न हो।
  • दरवाजे पर काला रंग न हो।
  • पूजा घर का दरवाजा शौचालय के दरवाजे के सामने न हो।
  • दरवाजे के नीचे से हवा का अत्यधिक प्रवेश न हो — दीपक बुझने का कारण बनता है।

यदि अलग कमरा नहीं

  • दीवार पर लगी पूजा अलमारी (मंदिर) में पर्दा या छोटे दरवाजे लगाएं।
  • खुली अलमारी (बिना दरवाजे) भी स्वीकार्य है यदि पर्दा लगा हो।
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शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शास्त्र, शिल्प शास्त्र, धार्मिक परंपरा
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