विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार, कई पुण्यात्माएँ जो सीधे स्वर्ग या वैकुण्ठ नहीं जातीं, वे यमराज की सभा में एक महाकल्प तक निवास करती हैं। वहाँ वे मनुष्यों के लिए दुर्लभ दिव्य भोगों का उपभोग करती हैं और देवताओं तथा मुनियों के सत्संग का लाभ उठाती हैं। जब उनके पुण्यों का क्षय होने लगता है, तब वे पुनः मृत्युलोक में किसी अत्यंत धनवान, सर्वज्ञ और सभी शास्त्रों में पारंगत उच्च कुल में जन्म लेती हैं, ताकि वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ा सकें और आत्म-चिंतन द्वारा परम गति को प्राप्त कर सकें।
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