विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कन्ध के चौबीसवें अध्याय में इस दूरी का सटीक वर्णन मिलता है। श्लोक ५.२४.४ में शुकदेव गोस्वामी बताते हैं — 'ततोऽधस्तात्सिद्धचारणविद्याधराणां सदनानि तावन्मात्र एव' — इसका अर्थ है कि राहु ग्रह से दस हजार योजन (लगभग अस्सी हजार मील) नीचे सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक स्थित हैं। इसी प्रकार सूर्यमंडल से दस हजार योजन नीचे राहु है। इस प्रकार सूर्य से राहु दस हजार योजन दूर और राहु से सिद्धलोक दस हजार योजन और नीचे है। ये सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक भुवर्लोक के सबसे ऊपरी, सर्वाधिक पवित्र और अलौकिक क्षेत्र हैं।
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