विस्तृत उत्तर
भगवान राम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहते हैं। उनकी कृपा के संकेत भी मर्यादा, सत्य और शांति के रूप में जीवन में प्रकट होते हैं।
आंतरिक संकेत — रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने लिखा है — 'जो प्रभु कृपा करहिं जनु जानी' — जब राम जी कृपालु होते हैं तो मन में स्वाभाविक रूप से सत्य के प्रति आकर्षण, असत्य से घृणा और धर्मानुकूल आचरण की प्रवृत्ति जागती है। मन में अकारण शांति और जीवन में एक संतुलन का अनुभव होता है।
जीवन में बदलाव — जब राम जी की कृपा होती है तो जटिल समस्याएँ सहज हल होती दिखती हैं, वचन-पालन में रुचि बढ़ती है, झूठ बोलना कठिन लगने लगता है और धर्म-आचरण में स्वाभाविक रुचि आती है।
रामायण में रुचि — जब रामकथा सुनने और रामचरितमानस पढ़ने में मन स्वाभाविक रूप से लगे, 'राम नाम' बिना प्रयास के उठते-बैठते होठों पर आए — यह राम जी की कृपा का सुंदर संकेत है।
स्वप्न में संकेत — राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान का शांत रूप में दर्शन, या श्वेत धनुष-बाण का दर्शन — कृपा के शुभ संकेत माने जाते हैं।
परिवार में सद्भाव — राम ने परिवार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। जब परिवार में प्रेम और मर्यादा बढ़े तो यह राम-कृपा है।





