विस्तृत उत्तर
रामानुजाचार्य ने अपने ब्रह्मसूत्र भाष्य में बादरि ऋषि के मत का खण्डन करते हुए सत्यलोक के बारे में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किया। बादरि ऋषि का मत था कि सत्यलोक के निवासी पुनर्जन्म के अधीन हो सकते हैं। परंतु रामानुजाचार्य ने यह सिद्ध किया कि यद्यपि सत्यलोक के निवासी सैद्धांतिक रूप से पुनर्जन्म के अधीन हो सकते हैं किन्तु वास्तव में उनका पुनर्जन्म नहीं होता क्योंकि वे महाकल्प के अन्त में ज्ञान प्राप्त करके मोक्ष को ही प्राप्त करते हैं। रामानुजाचार्य के इस मत का तात्पर्य यह है कि क्रम मुक्ति का मार्ग अंततः मोक्ष को ही ले जाता है। सत्यलोक के शुद्ध सत्वगुणी वातावरण में ज्ञान प्राप्ति के मार्ग में कोई बाधा नहीं होती इसलिए सत्यलोक के निवासी अनिवार्य रूप से मोक्ष प्राप्त करते हैं।
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