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विस्तृत उत्तर
सपिण्डीकरण के बाद नया पितृ वसु इसलिए बनता है क्योंकि इस संस्कार के पूर्ण होते ही प्रेत को पितृलोक में आधिकारिक प्रवेश मिलता है। मृत्यु से सपिण्डीकरण तक वह प्रेत कहलाता है। जब प्रेत के पिण्ड को पितरों के पिण्डों से मिला दिया जाता है, तब वह प्रेत की निम्न अवस्था से मुक्त होकर प्रथम पीढ़ी का पितृ बनता है। शास्त्रीय पितृ वर्गीकरण के अनुसार प्रथम पीढ़ी वसु स्वरूप होती है। इसलिए जो जीव कल तक प्रेत था, वह सपिण्डीकरण के बाद वसु रूप पितृ बन जाता है।
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