विस्तृत उत्तर
शिव आरती की विधि शिव पुराण और अग्नि पुराण में वर्णित है:
आरती का सही समय
- ▸प्रातः पूजन के बाद
- ▸सायं संध्या पूजन के बाद
- ▸मंदिर में: पाँच बार आरती — प्रातः 4, 7, 12, 7 PM, रात 10 बजे
आरती सामग्री
- ▸पंचमुखी दीप (5 बत्तियाँ) — पाँच तत्वों का प्रतीक
- ▸घी की बत्ती
- ▸कपूर
- ▸शंख, घंटी
- ▸आरती थाली
शिव आरती की क्रमिक विधि
1शंख और घंटी
आरती से पूर्व शंख और घंटी बजाएं।
2दीप आरती
पंचमुखी दीप से दक्षिणावर्त (clockwise) घुमाएं:
- ▸शिवलिंग के चरण भाग पर — 4 बार
- ▸मध्य भाग पर — 2 बार
- ▸शीर्ष पर — 1 बार
- ▸पूरे शिवलिंग के चारों ओर — 7 बार
3आरती गान
आरती उतारते समय गाएं:
> 'ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
> ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा।'
या
> 'जय-जय-जय शिव शंकर दानी, जगत के महाराज महाज्ञानी।'
4कपूर आरती
दीप आरती के बाद कपूर जलाकर आरती करें। कपूर की विशेषता — पूरा जल जाता है, कुछ शेष नहीं बचता — यह पूर्ण आत्मसमर्पण का प्रतीक है।
5प्रसाद ग्रहण
आरती की लौ को दोनों हाथों से स्पर्श करके नेत्रों से लगाएं।
6आरती अर्पण
> 'ॐ नमः शिवाय — महानीराजनं समर्पयामि'
शिव आरती का अर्थ
आरती में दीप की लौ = आत्मा की ज्योति। शिव को दीप दिखाना = अपनी आत्मा को शिव के प्रकाश में अर्पित करना।





