विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के तेईसवें अध्याय में शिशुमार चक्र के वर्णन में आकाशगंगा (Milky Way) को एक अत्यंत विशिष्ट स्थान दिया गया है। इस वर्णन के अनुसार शिशुमार चक्र का पेट (Belly) साक्षात 'आकाशगंगा' है। इस प्रकार भागवत पुराण में आकाशगंगा को शिशुमार के पेट के रूप में चित्रित किया गया है जो भगवान वासुदेव के विराट स्वरूप का एक अंग है। यह वर्णन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैदिक ऋषियों की खगोलीय जानकारी को दर्शाता है। आकाशगंगा तारों का वह विशाल समूह है जो रात के आकाश में एक धुंधली पट्टी के रूप में दिखती है। पुराणों में इसे शिशुमार के पेट के रूप में वर्णित करना इस बात का सूचक है कि ब्रह्मांडीय संरचना को एक जीवित प्राणी के शरीर के रूप में समझा जाता था।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





