विस्तृत उत्तर
तलातल लोक का अंतिम निष्कर्ष यह है कि यह केवल पृथ्वी के गर्भ में स्थित कोई भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि भौतिक सृष्टि के चरम ऐश्वर्य, मायावी भ्रम और आध्यात्मिक अज्ञानता का प्रतीक है। मय दानव के कुशल आधिपत्य और भगवान शिव के संरक्षण में यह लोक ब्रह्माण्ड की उस विलक्षण संरचना को दर्शाता है जहाँ चरम सुख उपलब्ध है, लेकिन शाश्वत शांति और मोक्ष नहीं। तलातल में भोग-विलास, शक्ति, धन, रत्नमय महल, रोग-वृद्धावस्था से मुक्ति और अपार ऐश्वर्य है, पर भगवान के श्रीचरणों के प्रति निश्छल समर्पण के बिना यह सब जीव को माया और जन्म-मरण के चक्र में बाँधता है। शाश्वत शांति और मोक्ष केवल ईश्वर-समर्पण में निहित हैं।
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