विस्तृत उत्तर
तलातल में सुख है लेकिन शांति नहीं, क्योंकि वहाँ भौतिक ऐश्वर्य और भोग-विलास तो अत्यधिक है, पर शाश्वत आध्यात्मिक शांति नहीं है। वहाँ के निवासी दिव्य मदिरा, सुंदरी स्त्रियों, उत्तम व्यंजनों, रत्नमय महलों और मायावी सुखों का भोग करते हैं। वे रोग, वृद्धावस्था और दरिद्रता से मुक्त रहते हैं। फिर भी उनके भीतर आध्यात्मिक दृष्टि और वैराग्य का अभाव है। वे माया, अहंकार और इंद्रियतृप्ति में बँधे रहते हैं। शाश्वत शांति और मोक्ष केवल भगवान के श्रीचरणों के प्रति निश्छल समर्पण में निहित है।
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