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तंत्र सामग्री📜 तंत्र शास्त्र, शाक्त परम्परा, हनुमान पूजा विधान1 मिनट पठन

तंत्र में सिंदूर का तांत्रिक प्रयोग कैसे होता है

संक्षिप्त उत्तर

सिंदूर तंत्र: (1) देवता लेपन — हनुमान/काली/गणेश। (2) यंत्र लेखन — शक्ति यंत्रों में। (3) ललाट तिलक — शक्ति/तेज/रक्षा। (4) रक्षा कवच। (5) हनुमान + सिंदूर + तेल = मनोकामना। कारण: लाल = शक्ति, पारद = शिव, गन्धक = शक्ति। शुद्ध सिंदूर — मिलावटी हानिकारक।

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विस्तृत उत्तर

सिंदूर (पारद + गन्धक आधारित लाल चूर्ण) तंत्र में अत्यन्त शक्तिशाली सामग्री माना जाता है।

तांत्रिक प्रयोग

1देवता लेपन

  • हनुमान जी को सिंदूर = शक्ति, रक्षा, वीरता।
  • काली माता/दुर्गा/भैरवी को सिंदूर अत्यन्त प्रिय।
  • गणेश जी (सिन्दूरी) को भी।

2यंत्र लेखन

सिंदूर + गुलाबजल/गंगाजल = लेप बनाकर भोजपत्र/ताम्रपत्र पर यंत्र बनाना। शक्ति/उग्र देवता यंत्रों में विशेष।

3तिलक

साधक के ललाट पर सिंदूर तिलक = शक्ति, तेज, रक्षा। हनुमान/भैरव साधकों में प्रचलित।

4रक्षा कवच

गले/बाहु पर सिंदूर से बिन्दु/रेखा = सूक्ष्म रक्षा कवच।

5मन्नत/प्रयोग

हनुमान को सिंदूर + तेल चढ़ाना = मनोकामना पूर्ति का सर्वप्रचलित तांत्रिक-भक्ति प्रयोग।

क्यों सिंदूर

  • लाल = रक्त, प्राणशक्ति, शक्ति का रंग।
  • पारद (Mercury) = शिव स्वरूप — रस शास्त्र में अत्यन्त शक्तिशाली।
  • सिंदूर = पारद + गन्धक = शिव + शक्ति का संयोग।

सावधानी: शुद्ध सिंदूर प्रयोग करें — बाज़ारी मिलावटी (lead-based) सिंदूर स्वास्थ्य हेतु हानिकारक।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, शाक्त परम्परा, हनुमान पूजा विधान
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