विस्तृत उत्तर
गुग्गुल (Commiphora mukul) तंत्र और पूजा में सबसे प्रमुख धूप सामग्री है। तंत्रसार में इसे षोडशांग धूप के 16 घटकों में गिना गया है।
तांत्रिक उपयोग
1वातावरण शुद्धि
गुग्गुल का धुआँ अत्यन्त पवित्र — साधना स्थल, यज्ञशाला, पूजा गृह की शुद्धि। सभी प्रकार की पूजा/साधना/हवन में अनिवार्य।
2तांत्रिक बाधा निवारण
पीली सरसों + गुग्गुल + लोबान + गौ घृत = मिलाकर धूप बनाएँ → कण्डे पर जलाएँ → 21 दिन = तांत्रिक अभिकर्म (किया-कराया) नष्ट।
3ग्रह शान्ति
गुग्गुल = राहु ग्रह से सम्बन्धित (कुछ ज्योतिष परम्पराओं में)। राहु शान्ति हेतु गुग्गुल धूप।
4हवन सामग्री
सभी हवनों/यज्ञों में गुग्गुल = अनिवार्य घटक। विशिष्ट तांत्रिक हवनों में भी।
5मस्तिष्क/शरीर
गुग्गुल सुगन्ध = मस्तिष्क शान्ति, सिरदर्द निवारण, हृदय रोग में लाभ (आयुर्वेद)।
दशांग धूप
चन्दन, कुष्ठ, नखल, राल, गुड़, शर्करा, नखगन्ध, जटामांसी, लघु, क्षौद्र = दशांग धूप — इसमें गुग्गुल भी मिलाया जाता है।
जलाने की विधि
कण्डे या कोयले पर गुग्गुल की गोली/टुकड़ा रखें। प्रातः और सन्ध्या दोनों समय। प्रतिदिन = घर में शान्ति, समृद्धि, रोग नाश।





