विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में योगिनी का अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत स्थान है। योगिनियाँ तंत्र साधना की आधारभूत देवी शक्तियाँ मानी जाती हैं।
योगिनी का स्वरूप
योगिनियाँ आद्याशक्ति (महाकाली/दुर्गा) की सहायक शक्तियाँ हैं। ये अर्ध-देवी श्रेणी में आती हैं — यक्ष, किन्नर, गन्धर्व के समान ही इनका विशिष्ट स्थान है। ये मात्र नारी आकृति नहीं — पूर्ण चैतन्य और तंत्र के गोपनीय रहस्यों की ज्ञाता होती हैं।
तंत्र में योगिनी का स्थान
1तंत्र साधना की आधारभूत देवी
तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार योगिनियाँ प्रत्येक तांत्रिक साधना का आधार हैं। बिना योगिनी-कृपा के तांत्रिक सिद्धियाँ दुर्लभ मानी गई हैं।
2आद्याशक्ति की प्रतिनिधि
तंत्र अनुसार योगिनी आद्याशक्ति के सबसे निकट होती हैं। माँ काली योगिनियों को आदेश देती हैं और योगिनी शक्ति साधकों के कार्य सिद्ध करती हैं।
3शिव-पार्वती संवाद (रुद्रयामल)
भगवान शिव ने पार्वती से कहा — 'योगिनी साधना ही एकमात्र ऐसा उपाय है जिससे मनुष्य भौतिक और आध्यात्मिक दोनों उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकता है। ये मेरी ही शक्ति का स्वरूप हैं।'
योगिनियों के प्रकार
- ▸चौसठ (64) योगिनियाँ — सर्वाधिक प्रसिद्ध। प्रत्येक एक विशेष शक्ति या तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- ▸षोडश (16) योगिनियाँ — प्रथम बार साधना करने वालों के लिए इन्हीं की साधना का विधान है।
- ▸सुरसुन्दरी (भूत डामर तंत्र में सर्वप्रमुख), कपिला, सिद्ध योगिनी आदि विशिष्ट योगिनियाँ।
योगिनी साधना का फल
भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति। आध्यात्मिक ज्ञान, सिद्धियाँ, शक्ति, धन, स्वास्थ्य, सौन्दर्य — सभी क्षेत्रों में अनुकूलता।
ऐतिहासिक प्रमाण
भारत में चौसठ योगिनी मंदिर — मितावली (मध्य प्रदेश) और हीरापुर (ओडिशा) — अद्वितीय गोलाकार संरचना में बने हैं, जो तंत्र साधना के प्रमुख केन्द्र माने जाते हैं।
महत्वपूर्ण सावधानी
योगिनी साधना में वासना का कोई स्थान नहीं। तंत्र वासना से परे ऊर्ध्वगामी प्रक्रिया है। योगिनी के प्रति कुदृष्टि या कुविचार रखने वाला साधक असफल होता है।