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तंत्र दीपक📜 तंत्र शास्त्र — दीपक विधान, स्कंद पुराण, आगम शास्त्र2 मिनट पठन

तंत्र साधना के दौरान दीपक क्यों जलाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र में दीपक: 'यत्र दीपो वर्तते तत्र देवः।' अग्नि = साक्षी। नकारात्मक ऊर्जा निवारण (रात्रि साधना में अनिवार्य)। वातावरण शुद्धि। त्राटक ध्यान। भैरव-काली: सरसों तेल 5 बाती। शिव: घी। नियम: साधना में दीपक न बुझे।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र में दीपक का महत्व तंत्र शास्त्र और स्कंद पुराण में वर्णित है:

तंत्र में दीपक की पाँच भूमिकाएं

1देवता की उपस्थिति

स्कंद पुराण: 'यत्र दीपो वर्तते तत्र देवः।' — जहाँ दीपक जलता है, वहाँ देव विराजते हैं।

2अग्नि = साक्षी

तंत्र में सभी अनुष्ठान अग्नि की साक्षी में होते हैं। दीपक = अग्नि देवता की उपस्थिति।

3नकारात्मक ऊर्जा निवारण

तंत्र शास्त्र: दीपक की लौ नकारात्मक ऊर्जाओं और अदृश्य बाधाओं को दूर करती है। रात्रि साधना में दीपक अनिवार्य।

4वातावरण शुद्धि

घी का दीपक — वायु शुद्ध करता है। सरसों तेल का दीपक — भैरव-काली साधना में विशेष।

5त्राटक

दीपक की लौ पर एकाग्रता (त्राटक) = ध्यान की एक विधि।

तंत्र देवता अनुसार दीपक

| देवता | दीपक |

|-------|------|

| काली/भैरव | सरसों तेल — 5 बाती |

| शिव | घी — 5 बाती |

| देवी | घी — एक लंबी बाती |

| लक्ष्मी | घी/तिल तेल |

नियम

साधना में दीपक कभी न बुझे — शक्ति अखंड रहे।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र — दीपक विधान, स्कंद पुराण, आगम शास्त्र
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