विस्तृत उत्तर
तंत्र में दीपक का महत्व तंत्र शास्त्र और स्कंद पुराण में वर्णित है:
तंत्र में दीपक की पाँच भूमिकाएं
1देवता की उपस्थिति
स्कंद पुराण: 'यत्र दीपो वर्तते तत्र देवः।' — जहाँ दीपक जलता है, वहाँ देव विराजते हैं।
2अग्नि = साक्षी
तंत्र में सभी अनुष्ठान अग्नि की साक्षी में होते हैं। दीपक = अग्नि देवता की उपस्थिति।
3नकारात्मक ऊर्जा निवारण
तंत्र शास्त्र: दीपक की लौ नकारात्मक ऊर्जाओं और अदृश्य बाधाओं को दूर करती है। रात्रि साधना में दीपक अनिवार्य।
4वातावरण शुद्धि
घी का दीपक — वायु शुद्ध करता है। सरसों तेल का दीपक — भैरव-काली साधना में विशेष।
5त्राटक
दीपक की लौ पर एकाग्रता (त्राटक) = ध्यान की एक विधि।
तंत्र देवता अनुसार दीपक
| देवता | दीपक |
|-------|------|
| काली/भैरव | सरसों तेल — 5 बाती |
| शिव | घी — 5 बाती |
| देवी | घी — एक लंबी बाती |
| लक्ष्मी | घी/तिल तेल |
नियम
साधना में दीपक कभी न बुझे — शक्ति अखंड रहे।





