विस्तृत उत्तर
तुलसी का पौधा हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे माता लक्ष्मी का स्वरूप कहा गया है। प्रतिदिन तुलसी की पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है।
प्रतिदिन तुलसी पूजा की विधि
- 1प्रातःकाल स्नान: सबसे पहले स्वयं स्नान करके शुद्ध हों। बिना स्नान के तुलसी की सेवा नहीं करनी चाहिए।
- 1जल अर्पण: तुलसी के पौधे में शुद्ध जल अर्पित करें। गंगाजल हो तो और उत्तम। जल सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही अर्पित करें।
- 1दीपक: शाम को तुलसी के सामने घी या सरसों तेल का दीपक अवश्य जलाएँ। यह नित्य करना चाहिए।
- 1परिक्रमा: तुलसी की परिक्रमा करें (कम से कम एक बार, उत्तम तीन बार)।
- 1तुलसी माला जप: तुलसी के सामने बैठकर तुलसी माला से 'ॐ तुलस्यै नमः' या विष्णु मंत्र का जप करें।
- 1प्रणाम: हाथ जोड़कर प्रणाम करें। तुलसी को माता/देवी के रूप में सम्मान दें।
- 1श्रृंगार (विशेष अवसर): विशेष अवसरों पर तुलसी को सिंदूर, चुनरी, फूल अर्पित कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण नियम
- ▸रविवार को तुलसी में जल अर्पित न करें और दीपक न जलाएँ।
- ▸सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पौधे को स्पर्श न करें।
- ▸तुलसी के पत्ते बिना प्रयोजन न तोड़ें।
- ▸तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु को अर्पित करने से पूजा पूर्ण होती है — तुलसी बिना विष्णु पूजा अधूरी है।
फल: पद्म पुराण के अनुसार — तुलसी के दर्शन, स्पर्श, पूजन और सेवन से मन-वाणी-शरीर के पाप मिट जाते हैं। जिस आँगन में तुलसी होती है, वहाँ नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती।





