विस्तृत उत्तर
ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण में वैराज प्रजापति का महत्वपूर्ण उल्लेख आता है, जो वैराज कुल और तपोलोक की ऊर्जा से संबंधित हैं। वैराज प्रजापति की एक पवित्र और सुशीला कन्या नद्वला थीं, जिनका विवाह चाक्षुष मनु से हुआ। उनके वंश से आगे चलकर कई तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुए और इसी वंशावली में राजा पृथु का जन्म हुआ। यह प्रसंग दिखाता है कि यद्यपि वैराज देवगण तपोलोक में निवास करते हैं और सांसारिक बंधनों से मुक्त हैं, फिर भी कल्प के आरंभ में सृष्टि के विस्तार, वंशावली के निर्माण और लोक-मर्यादा के रक्षण में वे प्रजापति रूप से योगदान देते हैं।
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