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विस्तृत उत्तर
इस कथा में वराह अवतार को आदिनाद की साकार और सक्रिय शक्ति से जोड़ा गया है। आदिनाद पहले सूक्ष्म ध्वनि था जिसने सृष्टि की शुरुआत की, और वराह उसी दिव्य ध्वनि का रौद्र रूप बनकर पृथ्वी को उठाने आए। इसका भाव है कि सृष्टि की ध्वनि केवल निर्माण ही नहीं करती, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर रक्षा भी करती है। वराह अवतार में नाद, श्वास और दिव्य कर्म एक साथ दिखाई देते हैं।
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