विस्तृत उत्तर
एक अत्यंत सूक्ष्म तांत्रिक प्रक्रिया के अंतर्गत, स्वर्ण (सोने) की अंगूठी या शलाका को शुद्ध शहद (Honey) में डुबोकर बच्चे की जिह्वा (जीभ) पर बीज मंत्र या 'ॐ हरि श्री गणपतये नमः' लिखा जाता है।
गूढ़ार्थ: स्वर्ण 'शुद्धता और मेधा' का प्रतीक है, जबकि शहद 'माधुर्य' का। जिह्वा पर यह संस्कार इस बात का आशीर्वाद है कि बच्चे की वाणी जीवन भर शुद्ध, सत्यमयी और मीठी रहे, तथा उसकी चेतना पर सदैव माँ सरस्वती का वास हो।
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