विस्तृत उत्तर
वितल लोक में भोग-विलास का परिणाम आध्यात्मिक अज्ञान और मोक्ष से दूरी है। वहाँ के निवासी हाटक स्वर्ण, रत्न, मदिरा, संगीत, सुंदर स्त्रियों और चिर-यौवन जैसे सुखों में डूबे रहते हैं। लेकिन इतने ऐश्वर्य के बावजूद उनमें आत्मा-परमात्मा का ज्ञान नहीं होता। वे अपनी वासनाओं और अहंकार के वशीभूत जीवन बिताते हैं और आध्यात्मिक प्रगति या मोक्ष पर विश्वास नहीं करते। इसलिए शास्त्र इसे अज्ञान का लोक मानते हैं। कर्म सिद्धांत के अनुसार, जब उनके सकाम पुण्यों का क्षय हो जाता है, तो उन्हें फिर पृथ्वी लोक पर जन्म लेना पड़ता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक




