विस्तृत उत्तर
हिन्दू विवाह परम्परा में विवाहित स्त्री अपने पति के गोत्र और वंश में पूर्णतः समाहित हो जाती है। सामान्य अवस्था में पितरों के श्राद्ध में पत्नियाँ अपने पतियों के देव-वर्ग, अर्थात वसु-रुद्र-आदित्य, के साथ ही सपत्नीक रूप में पूजी जाती हैं और उन्हीं देव-वर्गों का भाग प्राप्त करती हैं। गरुड़ पुराण के प्रेत खण्ड के अनुसार, यदि किसी माता की मृत्यु उसके पति और श्वसुर के जीवित रहते हो जाती है, तो सपिण्डीकरण संस्कार में उसे उमा, लक्ष्मी और सावित्री देवियों के साथ जोड़ा जाता है। परंतु सामान्य श्राद्ध व्यवस्था में विवाहित स्त्री पति के पितृ-वर्ग में सम्मिलित मानी जाती है।
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