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विस्तृत उत्तर
याज्ञवल्क्य स्मृति में श्राद्ध के देवताओं के रूप में वसु, रुद्र और आदित्य का वर्णन किया गया है। याज्ञवल्क्य स्मृति का श्लोक है—'वसुरद्रादितिसुताः पितरः श्राद्धदेवताः । प्रीणयन्ति मनुष्याणां पितॄन् श्राद्धेन तर्पिताः ॥' इसका अर्थ है कि वसु, रुद्र और आदित्य की संतानें अथवा स्वयं ये देव श्राद्ध के अधिष्ठाता देवता हैं। मनुष्यों द्वारा श्राद्ध कर्म में हविष्य और तर्पण से तृप्त किए जाने पर ये देवता ही मनुष्यों के विशिष्ट पितरों को तृप्त करते हैं।
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