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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतखण्ड के अनुसार यमलोक तक की यात्रा ८६,००० योजन लंबी है। यह दूरी मृत्युलोक और यमलोक के बीच बताई गई है। आत्मा को यह मार्ग ३४८ दिनों में तय करना होता है। आत्मा प्रतिदिन लगभग २००.५ योजन की दूरी वायु के वेग से बलपूर्वक तय करती है। यह यात्रा अत्यंत दुर्गम, अंधकारमय और भयंकर बताई गई है, जिसमें पापी आत्मा को प्रलयकाल के समान तपन, गर्म बालू, श्वान, भेड़िये, कौवे, भूख, प्यास और यमदूतों के कोड़ों का कष्ट सहना पड़ता है।
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