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ग्रहण विधि — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 12 प्रश्न

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ग्रहण विधि

ग्रहण काल में दान करने से पुण्य कई गुना क्यों बढ़ता है?

ग्रहण दान: पुण्यकाल (करोड़गुना — स्मृति), सन्धि काल=कर्मफल तीव्र, अशुद्धि में त्याग=अधिक पुण्य। तिल, अन्न, वस्त्र, ताँबा/चाँदी। ग्रहण मोक्ष समय सर्वोत्तम।

ग्रहण दानपुण्यकोटिगुण
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ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट क्यों बंद कर देते हैं?

कपाट बंद: सूतक (गर्भगृह सुरक्षा), राहु-केतु कवच, दर्शन वर्जित, पुनः शुद्धि बाद खुलें। भक्त=बाहर जप (करोड़गुना)। कुछ दक्षिण मंदिर=अपवाद।

ग्रहणमंदिर कपाटबंद
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ग्रहण के बाद भगवान की मूर्ति को स्नान कराना क्यों जरूरी है?

मूर्ति स्नान: सूतक शुद्धि, पुनः प्रतिष्ठा, आगम विधान (पंचामृत+गंगाजल), नवीन पूजा। स्वयं स्नान→मूर्ति अभिषेक→नवीन वस्त्र→आरती→कपाट खुलें।

ग्रहणमूर्ति स्नानशुद्धि
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सूर्य ग्रहण में गर्भवती महिला को लोहे की चीज क्यों रखनी चाहिए?

लोहा: लोक मान्यता — राहु निवारक, गर्भ कवच। आयुर्वेद: iron प्रतीक। वैज्ञानिक: सिद्ध नहीं। भावना सम्मान — हानि नहीं। सूर्य ग्रहण न देखें। मंत्र जप सर्वोत्तम।

गर्भवतीलोहाग्रहण
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ग्रहण काल में तुलसी का पत्ता भोजन में क्यों रखते हैं?

तुलसी ग्रहण: पवित्रतम, राहु निष्क्रिय। वैज्ञानिक: एंटीबैक्टीरियल (यूजेनॉल), प्राकृतिक preservative। दूध-दही-पानी सबमें। सूतक से पहले डालें, ग्रहण में न तोड़ें।

तुलसीग्रहणभोजन शुद्धि
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ग्रहण के बाद तुलसी के पत्ते भोजन में क्यों डालते हैं?

तुलसी ग्रहण में: धार्मिक — तुलसी सर्वाधिक पवित्र, अशुद्धि प्रवेश नहीं करती, अन्नशोधक। वैज्ञानिक — जीवाणुनाशक (यूजेनॉल), एंटीऑक्सीडेंट, प्राकृतिक परिरक्षक। विधि: सूतक से पहले सभी खाद्य पदार्थों में तुलसी डालें।

तुलसी ग्रहणभोजन शुद्धिजीवाणुनाशक
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ग्रहण काल में भोजन क्यों नहीं करना चाहिए?

ग्रहण भोजन वर्जित: धार्मिक — सूतक/अशुद्धि काल, पुण्यकाल में जप-तप करें। व्यावहारिक — सूक्ष्मजीव वृद्धि, पाचन प्रभाव, उपवास लाभ। सुरक्षा: पूर्व भोजन में तुलसी डालें, बाद में ताजा बनाएँ। रोगी/गर्भवती को छूट।

ग्रहण भोजनसूतकअशुद्धि
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ग्रहण के समय कौन से मंत्र जपने चाहिए?

ग्रहण मंत्र: गायत्री (सर्वश्रेष्ठ, दोनों ग्रहण), महामृत्युंजय (रक्षा), सूर्य ग्रहण: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः', चन्द्र: 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः', राहु-केतु मंत्र, इष्ट मंत्र। जप = करोड़गुना फल।

ग्रहण मंत्रजपगायत्री
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ग्रहण काल में गर्भवती महिला को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

गर्भवती ग्रहण नियम: बाहर न जाएँ, ग्रहण न देखें, कैंची-चाकू-सुई वर्जित, मंत्र जप (संतान गोपाल/गायत्री), दूर्वा रखें, मोक्ष बाद स्नान। स्वास्थ्य सर्वोपरि — भूख-प्यास पर भोजन-जल लें। वैज्ञानिक: सीधा ग्रहण देखना हानिकारक।

ग्रहण गर्भवतीगर्भ रक्षासावधानी
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ग्रहण के बाद स्नान और दान कैसे करें?

ग्रहण बाद: तुरंत स्नान (गंगाजल+तिल+कुश) → दान (अनंतगुना फल — तिल, अन्न, वस्त्र, धातु) → गृह शुद्धि (गंगाजल छिड़काव) → पूजा → तुलसी सहित ताजा भोजन। पुराना भोजन त्यागें। सूर्य ग्रहण: ताम्बा-गेहूँ दान। चन्द्र: चाँदी-चावल।

ग्रहण स्नानग्रहण दानमोक्ष स्नान
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सूर्य ग्रहण में सूतक का क्या नियम है?

सूर्य ग्रहण सूतक: 12 घण्टे पूर्व (चन्द्र: 9 घण्टे)। वर्जित: भोजन, शुभ कार्य, सोना। करें: जप, ध्यान। अपवाद: क्षेत्र में ग्रहण न दिखे तो सूतक नहीं, रोगी/गर्भवती/बच्चे को भोजन छूट। समाप्ति: ग्रहण मोक्ष + स्नान।

सूतकसूर्य ग्रहणअशुद्धि काल
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ग्रहण काल में पूजा और जप कैसे करें?

ग्रहण काल: स्नान → जप (सर्वोत्तम कर्म, करोड़गुना फल)। सूर्य ग्रहण: सूर्य मंत्र/गायत्री। चन्द्र ग्रहण: चन्द्र मंत्र/महामृत्युंजय। इष्ट मंत्र जप। मोक्ष पर: पुनः स्नान → दान → पूजा। भोजन में तुलसी डालें। सोना वर्जित।

ग्रहणसूर्य ग्रहणचन्द्र ग्रहण

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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