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पतंजलि — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 8 प्रश्न

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ध्यान साधना

ध्यान से सिद्धियां प्राप्त होती हैं क्या?

हां (पतंजलि 3.45 — अष्टसिद्धि)। किन्तु: 'सिद्धि = समाधि बाधा!' (3.37)। Byproduct, लक्ष्य नहीं। फंसना = पतन/अहंकार। 'सिद्धि = रास्ते का फूल — तोड़ो मत, आगे चलो।'

सिद्धिध्यानप्राप्त
ध्यान साधना

ध्यान और योग में क्या अंतर है?

शास्त्रीय: योग=सम्पूर्ण 8 अंग, ध्यान=7वाँ अंग। योगसूत्र: ध्यान=एक विषय पर निरंतर प्रवाह। आधुनिक: योग=आसन/शारीरिक, ध्यान=मानसिक। सम्बंध: आसन→प्राणायाम→प्रत्याहार→धारणा→ध्यान→समाधि। ध्यान=योग का हृदय। दोनों परस्पर पूरक।

ध्यानयोगअष्टांग योग
हिंदू दर्शन

सत्य अहिंसा अस्तेय ब्रह्मचर्य अपरिग्रह पांच यम

योगसूत्र 2.30 — पांच यम (महाव्रत, सार्वभौमिक): अहिंसा (सर्व प्राणी दया), सत्य (मन-वचन-कर्म एकरूपता), अस्तेय (चोरी/लालसा न), ब्रह्मचर्य (ऊर्जा संयम/ईश्वर-चिंतन), अपरिग्रह (अत्यधिक संग्रह न)। अहिंसा सबसे पहले = सर्वोच्च। जाति/देश/काल से परे — सभी मनुष्यों के लिए।

पांच यमयोगसूत्रपतंजलि
हिंदू दर्शन

यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि

अष्टांग योग (योगसूत्र 2.29): यम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह), नियम (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान), आसन (स्थिर सुख), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), प्रत्याहार (इंद्रिय निवृत्ति), धारणा (एकाग्रता), ध्यान (निरंतर चिंतन), समाधि (ध्याता-ध्येय एकत्व)।

अष्टांग योगपतंजलियोगसूत्र
ध्यान साधना

ध्यान और योग में क्या अंतर है?

शास्त्रीय: योग=सम्पूर्ण 8 अंग, ध्यान=7वाँ अंग। योगसूत्र: ध्यान=एक विषय पर निरंतर प्रवाह। आधुनिक: योग=आसन/शारीरिक, ध्यान=मानसिक। सम्बंध: आसन→प्राणायाम→प्रत्याहार→धारणा→ध्यान→समाधि। ध्यान=योग का हृदय। दोनों परस्पर पूरक।

ध्यानयोगअष्टांग योग
योग दर्शन

योग क्या है?

पतंजलि के अनुसार 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' — चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है। यह शरीर, मन और आत्मा को साधने की समग्र पद्धति है जिसके आठ अंग हैं — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।

योगपतंजलिअष्टांग योग
योग दर्शन

शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान — पांच नियम क्या हैं?

पतंजलि योग सूत्र (2.32): शौच (पवित्रता), संतोष (संतुष्टि), तप (अनुशासन/द्वंद्व सहन), स्वाध्याय (शास्त्र अध्ययन + ॐ जप), ईश्वर प्रणिधान (ईश्वर समर्पण)। ये अष्टांग योग का दूसरा अंग हैं। तप+स्वाध्याय+ईश्वर प्रणिधान = क्रियायोग।

पांच नियमअष्टांग योगपतंजलि
ध्यान साधना

ध्यान में द्रष्टा और दृश्य का भेद कैसे अनुभव करें?

पतंजलि (2.17): 'द्रष्टा+दृश्य भेद=मुक्ति।' विचार/शरीर/भावना=दृश्य। 'कौन देख रहा?'=मैं=द्रष्टा=आत्मा। रमण: 'मैं कौन?'=शरीर/मन/बुद्धि नहीं=**द्रष्टा।**

द्रष्टादृश्यभेद

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।