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हिंदू दर्शन📜 पतंजलि योगसूत्र (2.29-3.3)2 मिनट पठन

यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि

संक्षिप्त उत्तर

अष्टांग योग (योगसूत्र 2.29): यम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह), नियम (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान), आसन (स्थिर सुख), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), प्रत्याहार (इंद्रिय निवृत्ति), धारणा (एकाग्रता), ध्यान (निरंतर चिंतन), समाधि (ध्याता-ध्येय एकत्व)।

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विस्तृत उत्तर

अष्टांग योग पतंजलि के योगसूत्र (2.29) में वर्णित योग के आठ अंग हैं — 'यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टावङ्गानि।' ये क्रमशः बाह्य से आंतरिक साधना की ओर ले जाते हैं।

1यम (सामाजिक अनुशासन) — 5 यम

  • अहिंसा — किसी भी प्राणी को मन, वचन, कर्म से हिंसा न करना।
  • सत्य — सत्य बोलना और आचरण।
  • अस्तेय — चोरी न करना (भौतिक और बौद्धिक दोनों)।
  • ब्रह्मचर्य — इंद्रिय संयम, यौन ऊर्जा का सदुपयोग।
  • अपरिग्रह — आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना।

2नियम (व्यक्तिगत अनुशासन) — 5 नियम

  • शौच — शारीरिक और मानसिक शुद्धता।
  • संतोष — जो है उसमें संतुष्टि।
  • तप — कठिनाइयों को सहना, अनुशासन।
  • स्वाध्याय — शास्त्रों का अध्ययन और आत्म-अवलोकन।
  • ईश्वर प्रणिधान — ईश्वर के प्रति समर्पण।

3आसन (शारीरिक स्थिरता)

योगसूत्र 2.46 — 'स्थिरसुखमासनम्' — स्थिर और सुखपूर्वक बैठने की स्थिति। शरीर को ध्यान के लिए तैयार करना।

4प्राणायाम (श्वास नियंत्रण)

श्वास-प्रश्वास का सचेतन नियमन। पूरक (श्वास लेना), कुम्भक (रोकना), रेचक (छोड़ना)। प्राण ऊर्जा का नियंत्रण।

5प्रत्याहार (इंद्रिय निवृत्ति)

इंद्रियों को बाह्य विषयों से हटाकर अंतर्मुखी करना। कछुआ जैसे अंग समेटना (गीता 2.58)।

6धारणा (एकाग्रता)

मन को एक बिंदु/विषय पर स्थिर करना — नासिकाग्र, हृदय, ॐ, ज्योति, मूर्ति आदि।

7ध्यान (Meditation)

धारणा का निरंतर प्रवाह। एक विषय पर अखंड चिंतन — बिना विचलन।

8समाधि (Absorption)

ध्याता (ध्यान करने वाला), ध्येय (जिस पर ध्यान) और ध्यान — तीनों एक हो जाते हैं। यही योग का चरम लक्ष्य है। इसमें 'सबीज' (विषय सहित) और 'निर्बीज' (विषयरहित) भेद हैं। निर्बीज समाधि = कैवल्य (मोक्ष)।

क्रम का महत्व: बाह्य → आंतरिक। यम-नियम = नींव; आसन-प्राणायाम = शरीर-प्राण तैयारी; प्रत्याहार = मन अंतर्मुख; धारणा-ध्यान-समाधि = आत्मानुभव। बिना नींव के भवन नहीं — बिना यम-नियम के समाधि नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
पतंजलि योगसूत्र (2.29-3.3)
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