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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

आकर चारि लाख चौरासी । जाति जीव जल थल नभ बासी ॥ सीय राममय सब जग जानी । करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी ॥

Akara chari lakha chaurasi. Jati jiva jala thala nabha basi. Siya ramamaya saba jaga jani. Karaun pranama jori juga pani.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

चौरासी लाख योनियोंमें चार प्रकारके (स्वेदज, अण्डज, उद्भिज्ज, जरायुज) जीव जल, पृथ्वी और आकाशमें रहते हैं, उन सबसे भरे हुए इस सारे जगत्को श्रीसीताराममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ॥ १॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 1 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik