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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 23

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

प्रौढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की । कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की ॥ एकु दारुगत देखिअ एकू । पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू ॥ उभय अगम जुग सुगम नाम तें । कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें ॥ ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनासी । सत चेतन घन आनँद रासी ॥

Praudhi sujan jani jaanahin jan ki. Kahaun prateeti preeti ruchi man ki. Eku daarugat dekhia eku. Paavak sam jug brahma bibeku. Ubhay agam jug sugam naam ten. Kaheun naamu bad brahma raam ten. Byapaku eku brahma abinasi. Sat chetan ghan aanand raasi.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सज्जनगण इस बातको मुझ दासकी ढिठाई या केवल काव्योक्ति न समझें। मैं अपने मनके विश्वास, प्रेम और रुचिकी बात कहता हूँ। [निर्गुण और सगुण] दोनों प्रकारके ब्रह्मका ज्ञान अग्निके समान है। निर्गुण उस अप्रकट अग्निके समान है जो काठके अंदर है, परन्तु दीखती नहीं; और सगुण उस प्रकट अग्निके समान है जो प्रत्यक्ष दीखती है। [तत्त्वतः दोनों एक ही हैं; केवल प्रकट-अप्रकटके भेदसे भिन्न मालूम होती हैं। इसी प्रकार निर्गुण और सगुण तत्त्वतः एक ही हैं। इतना होनेपर भी] दोनों ही जाननेमें बड़े कठिन हैं, परन्तु नामसे दोनों सुगम हो जाते हैं। इसीसे मैंने नामको [निर्गुण] ब्रह्मसे और [सगुण] रामसे बड़ा कहा है, ब्रह्म व्यापक है, एक है, अविनाशी है; सत्ता, चैतन्य और आनन्दकी घनराशि है ॥ २-३ ॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 23 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik