वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी । सकल जीव जग दीन दुखारी ॥ नाम निरूपन नाम जतन तें । सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें ॥
As prabhu hridayan achhat abikari. Sakal jeev jag deen dukhari. Naam niroopan naam jatan ten. Sou pragatat jimi mol ratan ten.
ऐसे विकाररहित प्रभुके हृदयमें रहते भी जगत्के सब जीव दीन और दुखी हैं। नामका निरूपण करके (नामके यथार्थ स्वरूप, महिमा, रहस्य और प्रभावको जानकर) नामका जतन करनेसे (श्रद्धापूर्वक नामजपरूपी साधन करनेसे) वही ब्रह्म ऐसे प्रकट हो जाता है जैसे रत्नके जाननेसे उसका मूल्य ॥ ४ ॥
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