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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा । अकथ अगाध अनादि अनूपा ॥ मोरें मत बड़ नामु दुहू तें । किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें ॥

Agun sagun dui brahma saroopa. Akath agaadh anaadi anoopa. Moren mat bad naamu duhu ten. Kiye jehin jug nij bas nij boote.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

निर्गुण और सगुण—ब्रह्मके दो स्वरूप हैं। ये दोनों ही अकथनीय, अथाह, अनादि और अनुपम हैं। मेरी सम्मतिमें नाम इन दोनोंसे बड़ा है, जिसने अपने बलसे दोनोंको अपने वशमें कर रखा है ॥ १ ॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 1 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik