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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड चौपाई 2

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

गुर पितु मातु महेस भवानी । प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी ॥ सेवक स्वामि सखा सिय पी के । हित निरुपधि सब बिधि तुलसी के ॥ २ ॥

Gura pitu matu mahesa bhavani. Pranavaun dinabandhu dina dani. Sevaka svami sakha siya pi ke. Hita nirupadhi saba bidhi tulasi ke.

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीमहेश और पार्वतीको मैं प्रणाम करता हूँ, जो मेरे गुरु और माता-पिता हैं, जो दीनबन्धु और नित्य दान करनेवाले हैं, जो सीतापति श्रीरामचन्द्रजीके सेवक, स्वामी और सखा हैं तथा मुझ तुलसीदासका सब प्रकारसे कपटरहित (सच्चा) हित करनेवाले हैं॥ २॥

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