वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा । साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा ॥ अनमिल आखर अरथ न जापू । प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू ॥ ३ ॥
Kali biloki jaga hita hara girija. Sabara mantra jala jinha sirija. Anamila akhara aratha na japu. Pragata prabhau mahesa pratapu.
जिन शिव-पार्वतीने कलियुगको देखकर, जगत्के हितके लिये, शाबर मन्त्रसमूहकी रचना की, जिन मन्त्रोंके अक्षर बेमेल हैं, जिनका न कोई ठीक अर्थ होता है और न जप ही होता है, तथापि श्रीशिवजीके प्रतापसे जिनका प्रभाव प्रत्यक्ष है॥ ३॥
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस