वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
नर नारायन सरिस सुभ्राता । जग पालक बिसेषि जन त्राता ॥ भगति सुतिय कल करन बिभूषन । जग हित हेतु बिमल बिधु पूषन ॥
Nar narayan saris subhrata. Jag palak biseshi jan trata. Bhagati sutiya kal karan bibhushan. Jag hit hetu bimal bidhu pushan.
ये दोनों अक्षर नर-नारायणके समान सुन्दर भाई हैं, ये जगत्का पालन और विशेषरूपसे भक्तोंकी रक्षा करनेवाले हैं। ये भक्तिरूपिणी सुन्दर स्त्रीके कानोंके सुन्दर आभूषण (कर्णफूल) हैं और जगत्के हितके लिये निर्मल चन्द्रमा और सूर्य हैं ॥ ३ ॥
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