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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 3

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

उपजहिं एक संग जग माहीं । जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं ॥ सुधा सुरा सम साधु असाधू । जनक एक जग जलधि अगाधू ॥

Upajahin eka sanga jaga mahin. Jalaja jonka jimi guna bilagahin. Sudha sura sama sadhu asadhu. Janaka eka jaga jaladhi agadhu.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दोनों (संत और असंत) जगत्में एक साथ पैदा होते हैं; पर [एक साथ पैदा होनेवाले] कमल और जोंककी तरह उनके गुण अलग-अलग होते हैं। (कमल दर्शन और स्पर्शसे सुख देता है, किन्तु जोंक शरीरका स्पर्श पाते ही रक्त चूसने लगती है।) साधु अमृतके समान (मृत्युरूपी संसारसे उबारनेवाला) और असाधु मदिराके समान (मोह,प्रमाद और जड़ता उत्पन्न करनेवाला) है, दोनोंको उत्पन्न करनेवाला जगद्रूपी अगाध समुद्र एक ही है। [शास्त्रोंमें समुद्रमन्थनसे ही अमृत और मदिरा दोनोंकी उत्पत्ति बतायी गयी है] ॥ ३ ॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 3 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik