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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड चौपाई 4

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

कीन्हें प्राकृत जन गुन गाना । सिर धुनि गिरा लगत पछिताना ॥ हृदय सिंधु मति सीप समाना । स्वाति सारदा कहहिं सुजाना ॥

Kinhen prakruta jana guna gana. Sira dhuni gira lagata pachhitana. Hrudaya sindhu mati sipa samana. Svati sarada kahahin sujana.

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

संसारी मनुष्योंका गुणगान करनेसे सरस्वतीजी सिर धुनकर पछताने लगती हैं [कि मैं क्यों इसके बुलानेपर आयी]। बुद्धिमान् लोग हृदयको समुद्र, बुद्धिको सीप और सरस्वतीको स्वाति नक्षत्रके समान कहते हैं॥ ४॥

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