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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड चौपाई 4

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी । चहिअ अमिअ जग जुरइ न छाछी ॥ छमिहहिं सज्जन मोरि ढिठाई । सुनिहहिं बालबचन मन लाई ॥

Mati ati nicha unchi ruchi achhi. Chahia amia jaga jurai na chhachhi. Chhamihahin sajjana mori dhithai. Sunihahin balabachana mana lai.

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मेरी बुद्धि तो अत्यन्त नीची है और चाह बड़ी ऊँची है; चाह तो अमृत पानेकी है, पर जगत्में जुड़ती छाछ भी नहीं। सज्जन मेरी ढिठाईको क्षमा करेंगे और मेरे बालवचनोंको मन लगाकर (प्रेमपूर्वक) सुनेंगे॥ ४॥

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