वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
पुनि मन बचन कर्म रघुनायक । चरन कमल बंदउँ सब लायक ॥ राजिवनयन धरें धनु सायक । भगत बिपति भंजन सुखदायक ॥
Puni mana bachana karma raghunayaka. Charana kamala bandaun saba layaka. Rajivanayana dharen dhanu sayaka. Bhagata bipati bhanjana sukhadayaka.
फिर मैं मन, वचन और कर्मसे कमलनयन, धनुष-बाणधारी, भक्तोंकी विपत्तिका नाश करने और उन्हें सुख देनेवाले भगवान् श्रीरघुनाथजीके सर्वसमर्थ चरणकमलोंकी वन्दना करता हूँ॥ ५॥
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